सार्थक-पीडीएस(SARTHAK-PDS) योजना द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण 

पाठ्यक्रम: GS2/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था

संदर्भ

  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने दो प्रमुख खाद्य वितरण योजनाओं के एकीकरण और निरंतरता को एक नए समग्र कार्यक्रम के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की है, जिसका शीर्षक है – “राशन परिवहन और प्रबंधन में सहायता – सार्वजनिक वितरण में स्वचालन के साथ आय”

परिचय

  • सार्थक-पीडीएस योजना दो वर्तमान पहलों का एकीकरण करती है:
    • राज्य एजेंसियों को खाद्यान्नों की राज्य-आंतरिक आवागमन तथा उचित मूल्य दुकानदारों के मार्जिन हेतु सहायता (NFSA के अंतर्गत)
    • सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिकीकरण एवं सुधार योजना (SMART PDS)
  • इसका उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना है। योजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP) तथा ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग का प्रस्ताव है, जिससे पीडीएस संचालन का आधुनिकीकरण एवं अनुकूलन किया जा सके।

पीडीएस प्रणाली क्या है?

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भारत में खाद्य सुरक्षा का एक तंत्र है, जिसके माध्यम से आवश्यक खाद्य वस्तुएँ पात्र लाभार्थियों को उचित मूल्य दुकानों (FPSs) के जरिए रियायती दरों पर वितरित की जाती हैं।
    • मुख्यतः चावल, गेहूँ और मोटे अनाज आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को वितरित किए जाते हैं।
    • यह प्रणाली केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
  • केंद्र सरकार (भारतीय खाद्य निगम – FCI के माध्यम से) खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण, परिवहन और राज्यों को आवंटन करती है।
  • राज्य सरकारें बुनियादी स्तर पर खाद्यान्न वितरण, पात्र परिवारों की पहचान और राशन कार्ड जारी करने की जिम्मेदारी निभाती हैं।

भारत में पीडीएस का विकास

  • 1960 का दशक: खाद्य संकट के दौरान आधुनिक पीडीएस की शुरुआत हुई। हरित क्रांति के पश्चात 1970-80 के दशक में यह प्रणाली आदिवासी, दूरस्थ और गरीबी-प्रवण क्षेत्रों तक विस्तारित हुई।
  • 1992: पुनर्गठित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (RPDS) दूरस्थ, पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में खाद्य वितरण को सुदृढ़ करने हेतु शुरू की गई।
  • 1997: लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) प्रारंभ हुई, जिससे खाद्य सब्सिडी विशेष रूप से गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवारों तक पहुँचे।
  • 2000: अंत्योदय अन्न योजना (AAY) शुरू की गई, जिसका उद्देश्य “अत्यंत गरीब” परिवारों को अत्यधिक रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना था।

संवैधानिक एवं वैश्विक प्रतिबद्धताएँ

  • अनुच्छेद 21 के अंतर्गत खाद्य का अधिकार: सर्वोच्च न्यायालय ने खाद्य अधिकार को जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग माना है।
  • सतत विकास लक्ष्य (SDGs):
    • SDG 2 (शून्य भूख): 2030 तक भूख समाप्त करना, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषण सुधारना और सतत कृषि को बढ़ावा देना।
    • SDG 3 (अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण): सभी आयु वर्गों के लिए स्वस्थ जीवन और कल्याण को सुनिश्चित करना।

पीडीएस प्रणाली की चुनौतियाँ

  • खाद्यान्नों का विचलन: परिवहन के दौरान बड़ी मात्रा में खाद्यान्न अनधिकृत विचलन हो जाता हैं या काले बाजार में पहुँच जाते हैं।
  • बायोमेट्रिक सत्यापन से बहिष्करण: कई लोग मासिक राशन से वंचित हो जाते हैं क्योंकि उनका नाम सत्यापन के बाद सूची से हट जाता है।
  • समावेशन एवं बहिष्करण त्रुटियाँ: अपात्र परिवार लाभ प्राप्त कर लेते हैं, जबकि वास्तविक लाभार्थी पहचान की खामियों के कारण वंचित रह जाते हैं।
  • उचित मूल्य दुकानों में भ्रष्टाचार: कम तौल, निम्न गुणवत्ता वाले खाद्यान्न या अधिक मूल्य वसूलना।
  • अपर्याप्त भंडारण सुविधाएँ: खाद्यान्नों के खराब होने और बर्बादी की समस्या।
  • पोषण संबंधी सीमाएँ: पीडीएस मुख्यतः अनाज पर केंद्रित है, जबकि दालें, मोटे अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की कमी है।

सुधार एवं आधुनिकीकरण प्रयास

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013: भारत की दो-तिहाई जनसंख्या को रियायती दरों पर खाद्यान्न का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
  • TPDS नियंत्रण आदेश, 2015: केंद्र और राज्यों की जिम्मेदारियाँ निर्धारित की गईं तथा शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया गया।
  • डिजिटल राशन कार्ड एवं आधार आधारित प्रमाणीकरण: फर्जी और डुप्लीकेट राशन कार्ड समाप्त करने हेतु।
  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT): कुछ क्षेत्रों में लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे धनराशि हस्तांतरित की जाती है।
  • नागरिक-केंद्रित अनुप्रयोग: ‘मेरा राशन’, ‘अन्न मित्र’, ‘राइटफुल टार्गेटिंग डैशबोर्ड’ और ‘अन्न सहायता’ जैसी पहलें पारदर्शिता और पहुँच बढ़ाने हेतु।

आगे की राह

  • बुनियादी ढाँचे का विस्तार: भंडारण और परिवहन सुविधाओं को सुदृढ़ करना।
  • तकनीकी एकीकरण: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ब्लॉकचेन का उपयोग कर वास्तविक समय में निगरानी और अक्षमताओं को कम करना।
  • सामाजिक लेखा परीक्षा एवं शिकायत निवारण: जवाबदेही सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार व लीकेज की समस्याओं को दूर करने हेतु।
  • पोषण टोकरी का विस्तार: दालें और पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल कर पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करना।

स्रोत: DD News

 

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